नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज: 30 साल का सत्याग्रह और आदिवासी संघर्ष की ऐतिहासिक जीत
जोहार!
नेतरहाट — छोटानागपुर की रानी।
सुबह के सूर्योदय, ठंडी हवाओं और अपने प्रसिद्ध स्कूलों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।
लेकिन 245 गांवों के आदिवासी समुदायों के लिए, नेतरहाट केवल सुंदर पहाड़ियां नहीं था — यह 30 वर्षों तक चले अस्तित्व के संघर्ष का मैदान था।
अप्रैल 2026 में, जब धूल काफी हद तक बैठ चुकी है, तब भी यह आंदोलन हमें याद दिलाता है कि अहिंसा और एकता से आदिवासी समाज क्या हासिल कर सकता है।
📜 इतिहास: 1964 से 2022 तक
Netarhat Field Firing Range (NFFR) की स्थापना 1964 में Manoeuvres Field Firing and Artillery Practices Act, 1938 के तहत की गई थी।
इसका दायरा कितना बड़ा था?
- लगभग 1,470 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र
- Latehar और Gumla जिलों तक फैला क्षेत्र
- 245 गांव सीधे प्रभावित
- 2.25 लाख से अधिक लोग विस्थापन के खतरे में
इनमें मुख्य रूप से Oraon, Munda, Kharia और Birjia समुदाय शामिल थे।
22 मार्च 1994 को हजारों आदिवासियों ने मानव श्रृंखला बनाकर आर्मी के काफिले को रोक दिया। उस दिन के बाद इस भूमि पर एक भी गोला नहीं दागा गया।
✅ सरकार का पक्ष: क्यों जरूरी माना गया?
सरकार और रक्षा पक्ष के अनुसार, फायरिंग रेंज के पीछे कुछ बड़े तर्क दिए गए:
1. राष्ट्रीय सुरक्षा
भारतीय सेना को भारी तोपखाने और लंबी दूरी के mortar practice के लिए dedicated क्षेत्र की जरूरत थी।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
कुछ लोगों का मानना था कि स्थायी सैन्य उपस्थिति से सड़कें, सुरक्षा और peripheral development बढ़ेगा।
3. रणनीतिक प्रशिक्षण
नेतरहाट की पहाड़ी भूगोल high-altitude combat simulation के लिए उपयुक्त मानी गई।
❌ जनता का पक्ष: असली कीमत क्या थी?
Jan Sangharsh Samiti और आदिवासी नेताओं ने इस परियोजना की भारी मानवीय और पर्यावरणीय कीमत बताई।
1. सामूहिक विस्थापन
245 गांवों का मिटना सिर्फ घरों का नुकसान नहीं होता — यह पीढ़ियों की वंश परंपरा का अंत होता।
2. पर्यावरणीय विनाश
नेतरहाट eco-sensitive zone है। लगातार artillery fire से जंगल, वन्यजीव और जल स्रोत नष्ट हो सकते थे।
3. मानवाधिकार उल्लंघन
30 वर्षों के संघर्ष में स्थानीय महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, पशुधन की हानि और सामाजिक असुरक्षा की कई रिपोर्टें सामने आईं।
4. PESA और 5th Schedule का उल्लंघन
ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों को नजरअंदाज किया गया। निर्णय लोगों के बिना, लोगों पर थोपा जा रहा था।
क्या विकास किसी समुदाय की पहचान मिटाकर किया जा सकता है?
🚩 2026 की स्थिति: ऐतिहासिक जीत
अगस्त 2022 में झारखंड सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए फायरिंग रेंज को re-notify नहीं करने का फैसला किया।
यह सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं था — यह 30 साल की जनशक्ति की जीत थी।
अहिंसा की वैश्विक मिसाल
आज यह आंदोलन दुनिया भर में सफल Gandhian Satyagraha के उदाहरण के रूप में पढ़ा जाता है।
लेकिन संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ
फायरिंग रेंज खत्म हुई, लेकिन नए खतरे सामने हैं:
- Bauxite Mining
- Palamu Tiger Reserve Expansion
- नई भूमि अधिग्रहण योजनाएँ
🌿 Toppo AT की दृष्टि
नेतरहाट की जीत यह साबित करती है कि विकास कभी भी मानव पहचान की कीमत पर नहीं थोपा जा सकता।
आज जब हम नेतरहाट की खूबसूरत पहाड़ियों को देखते हैं, तो हमें युद्धभूमि नहीं दिखाई देती — हमें एकजुट समुदाय की शक्ति दिखाई देती है।
🏞️ नेतरहाट हमें क्या सिखाता है?
- अहिंसा सबसे बड़ी ताकत है
- ग्राम सभा केवल बैठक नहीं, अधिकार है
- जंगल और जमीन सिर्फ संसाधन नहीं, पहचान हैं
- जब समुदाय एकजुट होता है, इतिहास बदलता है
नेतरहाट केवल एक स्थान नहीं — यह आदिवासी स्वाभिमान का जीवित अध्याय है।